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तना छेदक कीट

अकेले कीटों पर ध्यान देने से नहीं बनेगी बात, साथ में करना होगा ये काम: एग्री एडवाइजरी

अकेले कीटों पर ध्यान देने से नहीं बनेगी बात, साथ में करना होगा ये काम: एग्री एडवाइजरी

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रीसर्च (ICAR) के अनुसार, सोयाबीन, मक्का व हरी सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को खरपतवार नियंत्रण के प्रति जागरुक होने की आवश्यकता है। दरअसल, खरीफ फसल की बुवाई के लिए सही वक्त पर, सही बीज का, सही तरीके से‌ इस्तेमाल करना आवश्यक होता है। वैसे धान और खरीफ के फसल की‌ बुवाई करीब-करीब आस-पास ही होती है।

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हरे भरे खेतों में छोटे छोटे पौधों का तीव्र गति से पुष्पित पल्लवित होना किसान भाईयों के हृदय में एक नयी उर्जा का संचार करता है। लहलहाते पौधों को देख कर खुशी से उनका मन मयूर नाच उठता है। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रीसर्च ने कृषकों के हित में एक एग्रो एडवाइजरी बोर्ड (Agro Advisory Board) का गठन किया है। एडवाइजरी बोर्ड का कहना है कि धान व खरीफ की फसलों के दौरान एक ऐसी स्थिति आती है, जब धान व खरीफ के पौधों में पत्ता मरोंड या फिर तना छेदक कीटें अपनी जड़ें जमा लेती हैं। तना छेदक कीटों से बचाव के लिए किसान को एडवाइजरी बोर्ड द्वारा जारी की गयी दवाइयों का बढ़-चढ़ कर इस्तेमाल करना चाहिए। किसानों को पौधों के‌ निचले भागों में जाकर समय समय पर निरीक्षण करते रहना चाहिए। कीटाणु पौधों के निचले हिस्से ही में अक्सर अपनी जड़ें जमाए बैठे रहते हैं। कीटाणु नाशक दवाइयों का छिड़काव भी समय-समय पर करते रहना चाहिए। सोयाबीन व सब्जियों ‌वाले किसानों को खरपतवार नियंत्रण के दौरान निराई व गुड़ाई‌ की सख्त आवश्यकता है। देशी खाद व फास्फोरस नामक उर्वरक के प्रयोग की भी हिदायतें दी गयी हैं। सब्जियों की खेती करने वाले किसानों, बेशुमार फल देने वाले‌ पौधों व शीर्ष छेदक कीटों से पौधों की सुरक्षा का निर्देश भी दिया गया है।

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फूल गोभी व पत्ता गोभी में फिरोमोन प्रपंच का छिड़काव जारी‌ करने का आदेश दिया गया है। बैगन, टमाटर, हरी मिर्च, फूल गोभी व पत्ता गोभी के पौधों को मिट्टी के मेड़ों पर बोवाई करने की सलाह दी गयी है। कृषक एडवाइजरी बोर्ड के अनुसार किसानों को किसी भी प्रकार के बीज व खाद की खरीददारी किसी प्रमाणित स्रोत से ही करनी चाहिए। हरे भरे मौसमी सब्जियों की बुवाई को तथाकथित ऊंची मेड़ों पर करने से फसल बेहतर होती हैं। किंतु, यहाँ पर ध्यान देने की आवश्यकता यह है कि फसल कितनी भी अच्छी क्यों ना हो, अगर‌ प्रत्येक दो तीन दिन के अंतराल में खरपतवार व साफ सफाई का ध्यान नहीं रखा जाए तो उसमें कीटें प्रवेश करने से बाज नहीं आते हैं। सारे किये कराए पर तब पानी फिर जाता है। इसलिए समय समय पर खरपतवार को बारीकी से निकाल कर पौधों को स्वच्छता पूर्वक सामान्य ढंग से पनपने के लिए छोड़ना होगा।

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इस प्रकार मात्र थोड़ी सी सावधानी बरतने से किसान भाइयों की मेहनत अवश्य रंग लाएगी। मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है।
धान के दुश्मन कीटों से कैसे करें बचाव, वैज्ञानिकों ने बताए टिप्स

धान के दुश्मन कीटों से कैसे करें बचाव, वैज्ञानिकों ने बताए टिप्स

धान की बुवाई गतिविधियों को प्रभावित करने वाले पूर्वी क्षेत्रों में मानसूनी वर्षा में इस साल काफी कमी दर्ज की गयी है। अनुमान है कि 2022-23 फसल वर्ष (जुलाई-जून) के लिए देश का चावल उत्पादन पिछले साल के रिकॉर्ड स्तर से कम से कम 10 मिलियन टन कम हो सकता है। मानसून के कमजोर होने के कारण उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड के कुछ हिस्सों में धान की बुवाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। सबसे बड़े चावल उत्पादक पश्चिम बंगाल में 23 में से 15 जिलों में कम बारिश हुई है, जिससे फसल के नुकसान की संभावना बढ़ गई है। लेकिन, इसके साथ ही अब धान में विभिन्न तरह के कीटों के कारण रोगों की भी आशंका बन रही है। पंजाब में पहले से ही एक रहस्यमयी वायरस के कारण धान के पौधे बौने होते जा रहे हैं, साथ ही तना छेदक कीट का प्रकोप भी झेलना पड़ सकता है। ऐसे में, कृषि वैज्ञानिकों की राय अहम् हो जाती है। यह भी पढ़ें : अकेले कीटों पर ध्यान देने से नहीं बनेगी बात, साथ में करना होगा ये काम: एग्री एडवाइजरी

ब्राउन प्लांट होपर से बचाव

पूसा के एग्रीकल्चरल साइंटिस्ट्स ने अपनी सलाह में कहा है कि इस साल ब्राउन प्लांट होपर (पौधे का कत्थई फुदका - Brown Plant Hopper) जैसे कीट का आक्रमण देखने को मिल सकता है। इससे बचाव के लिए किसानों को खेत में जा कर मच्छारानुमा कीट को देखने की जरूरत है। यदि वे इसे वहाँ पाते हैं, तो किसानों को उस क्षेत्र में डाईनेटोफुरान ( Dinotefuran ) नाम की दवा का इस्तेमाल करना होगा और प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में इसका 100 ग्राम ले कर छिड़काव करना चाहिए, ताकि ब्राउन प्लांट होपर को ख़त्म किया जा सके।

बासमती की सुरक्षा

धान का आभासी कांगियारी या कंडुवा रोग यानी राइस फाल्स स्मट डिजीज (False smut of rice (Villosiclava virens) disease), जो फंगस यूस्टिलागिनोइडिया विरेन्स  के कारण होता है, वर्तमान में दुनिया में सबसे विनाशकारी चावल कवक रोगों में से एक है। राइस फाल्स स्मट रोग न केवल गंभीर उपज हानि और अनाज की गुणवत्ता में कमी का कारण बनता है, बल्कि इसके माइकोटॉक्सिन के उत्पादन के कारण खाद्य सुरक्षा को भी खतरा है। इस रोग के कई लक्षण हैं, जैसे धान की गांठों पर छोटे नारंगी दाने दिखाई देने लगते हैं, प्रभावित दानों में पीली हल्दी या काला पाउडर दिखाई देता है। दानों को छूने पर यह चूर्ण हाथ में लग जाता है। इस रोग से प्रभावित होने पर दानों का रंग फीका पड़ जाता है और उनका वजन कम हो जाता है। इस रोग के लक्षण फूल आने की अवस्था में प्रकट होते हैं, इसका समाधान यही है कि रोग ग्रस्त बीजों का प्रयोग न करें। यह भी पढ़ें : धान की खड़ी फसलों में न करें दवा का छिड़काव, ऊपरी पत्तियां पीली हो तो करें जिंक सल्फेट का स्प्रे बीज हमेशा प्रमाणित स्रोतों से ही खरीदें, फिर रोग प्रतिरोधी किस्मों का चुनाव करें। खेतों, खेत के बांधों और सिंचाई नालियों को खरपतवारों से मुक्त रखें। इस बीमारी से बचने के लिए बुवाई से पहले बीज को 52 डिग्री सेंटीग्रेड पर 10 मिनट तक उपचारित करें इसके अलावा फफूंदनाशक दवाओं से भी बीजों का उपचार किया जा सकता है। रोकथाम के लिए पिकोक्सीस्ट्रोबिन 7.05% एससी, प्रोपिकोनाजोल 11.7% एससी जो बाजार में गैलीलियो (ड्यूपॉन्ट) के रूप में उपलब्ध है, इसको 360 मिली 200 लीटर पानी में 10 दिनों के अंतराल पर फूल आने की अवस्था में दो बार स्प्रे करें। दवाओं का छिड़काव सुबह या शाम को ही सूर्योदय से पहले करें।

तना छेदक से कैसे बचाएं धान

तना छेदक यानी स्टेम बोरर (stem borer) की छह प्रजातियां चावल पर हमला करती हैं। तना छेदक धान को अंकुर से लेकर परिपक्वता तक किसी भी अवस्था में नष्ट कर सकते हैं। तना छेदक लार्वा पौधों के तना और जड़ पर छेद करते हैं। तनों और टिलर पर छोटे छेद हो तो इसका अर्थ है की आपकी फसल पर इसका आक्रमण हो चुका है, इसके लिए आपको धान की प्रतिरोधी किस्मों का प्रयोग करना चाहिए। यह भी पढ़ें : धान की उन्नत किस्में अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान हो रहे मजबूत सीड बेड और ट्रांसप्लांट के समय इसके अंडे को हाथ से तोड़कर नष्ट कर दें। समय-समय पर सिंचाई के पानी का स्तर बढ़ाएं ताकि पौधे के निचले हिस्से में जमा अंडे जलमग्न हो जाएं। रोपाई से पहले, बीज की क्यारी से खेत तक अंडों के ले जाने को कम करने के लिए पत्ती के उपरी हिस्से को काट लें। जैविक नियंत्रण एजेंटों को प्रोत्साहित करें जैसे ब्रोकोनिड, यूलोफिड, मायमैरिड, स्केलिओनिड, चेल्सीड, टेरोमेलिड और ट्राइकोग्रामाटिड ततैया, चींटियाँ, लेडी बीटल, स्टैफिलिनिड बीटल, ग्रिलिड, ग्रीन मीडो टिड्डा,और मिरिड, फोरिड और प्लैटिसोमैटिड मक्खियाँ, बेथिलिड, ब्रोकोनिड और एलास्मिड।